वसीम बरेलवी

वो अपने वक़्त के नशे में खुशियाँ छीन ले तुझसे मगर जब तुम हँसी बाँटों तो उसको भूल मत जाना (वक़्त-time)

Posted at 6:56 पूर्वाह्न on मई 20, 2008 | leave a comment | Filed Under: वसीम बरेलवी | Tagged: , , , , | read on

फिराक़ गोरखपुरी

मासूम है मोहब्बत, लेकिन इसी के हाथों ऐ जान-ए-इश्क़ ! मैंने तेरा बुरा भी चाहा (मासूम- innocent / ऐ जान-ए-इश्क़-oh my love!)

Posted at 6:46 पूर्वाह्न on मई 20, 2008 | leave a comment | Filed Under: फिराक़ गोरखपुरी | Tagged: , , , , | read on


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